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Wednesday, February 1, 2023

पंजाब में AAP बनाम राज्यपाल: गर्वनर ने सरकार से मांगी सत्र की जानकारी, नाराज CM बोले- 75 सालों में तो ऐसा कभी नहीं हुआ…

AAP vs Governor in Punjab : दिल्ली में सरकार बनाम उपराज्यपाल की तर्ज पर पंजाब में राज्य की सरकार बनाम राज्यपाल के बीच तनातनी देखने को मिल रही है. पंजाब के राज्यपाल कार्यालय ने 27 सितंबर के विधानसभा सत्र में होने वाले विधायी कार्य का ब्योरा मांगा है, जिस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि यह हद पार करने जैसा है. मान ने एक ट्वीट में कहा कि एक दिन राज्यपाल ‘‘मंजूरी देने के लिए सभी भाषण मांगेंगे.’’Also Read – पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: किसानों की हर मांग पूरी करेंगे, किसान यूनियनों ने जताई खुशी, कहा-अब विरोध प्रदर्शन कैंसिल

पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने 27 सितंबर को एक सत्र बुलाने का फैसला किया है. इससे पहले सरकार ने विश्वास मत हासिल करने के लिए 22 सितंबर को विधानसभा की विशेष बैठक बुलायी थी. लेकिन राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने इसकी अनुमति नहीं दी थी. सरकार ने यह भी कहा कि वह राजभवन के कदम को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी. Also Read – Bhagwant Mann Marriage Today: भगवंत मान-गुरप्रीत की शादी में आज क्या-क्या होंगी रस्में, जानिए पूरा कार्यक्रम

इससे पहले, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि 27 सितंबर के सत्र में पराली जलाने और बिजली आपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. पंजाब राजभवन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार राज्यपाल कार्यालय ने पंजाब विधानसभा के सचिव को पत्र लिखकर 27 सितंबर को प्रस्तावित सत्र में होने वाले विधायी कार्य का विवरण मांगा. Also Read – पंजाब की मान सरकार का बड़ा एक्शन-424 वीआईपी लोगों की हटाई सुरक्षा, कहा-इन्हें क्या जरुरत है…

Gov/Presi consent before any session of Legislature is a formality. In 75 years, no Presi/Gov ever asked list of Legislative business before calling session. Legislative business is decided by BAC and speaker. Next Gov will ask all speeches also to be approved by him.its too much

— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) September 23, 2022

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मान ने ट्वीट किया कि विधायिका के किसी भी सत्र से पहले राज्यपाल या राष्ट्रपति की सहमति एक “औपचारिकता” है. 75 सालों में, किसी भी राष्ट्रपति या राज्यपाल ने सत्र बुलाने से पहले विधायी कार्यों की सूची नहीं मांगी.

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