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Wednesday, February 8, 2023

‘असली’ शिवसेना मामले में उद्धव गुट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रोक से इनकार

Maharashtra Political Update: सुप्रीम कोर्ट से उद्धव ठाकरे गुट (Uddhav Thackeray) को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ‘असली’ शिवसेना (Real Shiv Sena) के रूप में मान्यता देने और पार्टी का चुनाव चिह्न तीर-कमान ( Shiv Sena Election Symbol) आवंटित करने संबंधी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट की याचिका की सुनवाई पर आगे बढ़ने के लिए चुनाव आयोग (Election Commission of India) को अनुमति दे दी. न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने उद्धव ठाकरे नीत खेमे की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने ‘मूल’ शिवसेना होने के शिंदे खेमे के दावे पर फैसला करने से निर्वाचन आयोग को रोकने का अनुरोध किया था. पीठ में न्यायमूर्ति एम आर शाह, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी शामिल थे. संविधान पीठ ने कहा, ‘हम निर्देश देते हैं कि निर्वाचन आयोग के समक्ष कार्यवाही पर कोई रोक नहीं होगी.’Also Read – मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को धमकी देने के मामले का खुलासा, मात्र 5 रुपये की नाराजगी के चलते दे डाली झूठी सूचना

Supreme Court declines to stay the proceedings before the Election Commission of India on Shinde group’s claim for recognition as ‘real’ Shiv Sena.

Court rejects plea of Uddhav Thackeray group seeking stay on proceedings before the Election Commission.

— ANI (@ANI) September 27, 2022

Also Read – मुख्यमंत्री शिंदे की जान को खतरा, खुफिया सूचना के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुनाव आयोग को ‘असली’ शिवसेना को लेकर शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे के दावे पर निर्णय लेने से रोकने का अनुरोध किया गया था. बता दें कि इस साल जून महीने में शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ एकनाथ शिंदे और 39 अन्य विधायकों के विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी सरकार गिर गई थी. इसके बाद एकनाथ शिंदे और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के देवेंद्र फडणवीस ने 30 जून को क्रमश: राज्य के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. Also Read – मुंबई में चर्चित हो रहे हैं कमलाबाई, पेंगुइन सेना, केकड़ा जैसे शब्द, जानें कौन किसके लिए कर रहा है इस्तेमाल

सुप्रीम कोर्ट ने बीते 23 अगस्त को शिवसेना और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से दाखिल उन याचिकाओं को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया था, जिनमें दलबदल, विलय और अयोग्यता से जुड़े कई संवैधानिक सवाल उठाए गए हैं.

इसने निर्वाचन आयोग से शिंदे खेमे की याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं करने के लिए कहा था. साथ ही यह भी कहा गया था कि उसे ‘असली’ शिवसेना माना जाए और पार्टी का चुनाव चिह्न दिया जाए. पीठ ने कहा था कि याचिकाएं संविधान की 10वीं अनुसूची से जुड़े कई अहम संवैधानिक मुद्दों को उठाती हैं, जिनमें अयोग्यता, अध्यक्ष एवं राज्यपाल की शक्तियां और न्यायिक समीक्षा शामिल है. संविधान की 10वीं अनुसूची में निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के उनके राजनीतिक दलों से दलबदल की रोकथाम का प्रावधान है और इसमें दलबदल के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं.

ठाकरे खेमे ने पहले कहा था कि शिंदे के प्रति निष्ठा रखने वाले पार्टी विधायक किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय करके ही संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से खुद को बचा सकते हैं. शिंदे खेमे ने दलील दी थी कि दलबदल रोधी कानून उस नेता के लिए कोई आधार नहीं है जिसने अपनी ही पार्टी का विश्वास खो दिया है.

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