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Tuesday, January 31, 2023

Pitru Paksha 2022: त्रयोदशी श्राद्ध आज, राहु-केतु के प्रभाव से मुक्ति चाहिए तो आज के दिन करें इन चीजों का दान

Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष की त्रयोदशी तिथि का अपना अलग महत्व है क्योंकि इस दिन वैसे तो उन लोगों का श्राद्ध होता है जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि के दिन हुई हो. लेकिन अगर किसी व्यक्ति की (Pitru Paksha 2022 Date) मृत्यु की तिथि न पता हो तो त्रयोदशी श्राद्ध के दिन उनका तर्पण किया जा सकता है. (Pitru Paksha 2022 Tithi) साथ ही इस दिन स्वर्गवासी बच्चों का श्राद्ध करना भी उत्तम माना गया है.Also Read – Sarva Pitru Amavasya 2022: सर्वपितृ अमावस्या के दिन ये उपाय करने से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद, कभी नहीं होगी धन की कमी

पितृपक्ष त्रयोदशी तिथि 2022

हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह की त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर 2022 को सुबह 1 बजकर 17 मिनट पर शुरू हो गई है और इसका समापन 24 अक्टूबर को सुबह 2 बजकर 30 मिनट पर होगा. Also Read – Sarva Pitru Amavasya 2022: पितृपक्ष के अंतिम दिन जरूर लगाएं 16 पुड़ियों का भोग, जानिए क्या है इसका महत्व

त्रयोदशी तिथि का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन स्वर्गवासी बच्चों का श्राद्ध करना उत्तम होता है. लेकिन ध्यान रखें कि 2 साल या उससे कम उम्र के बच्चे का कभी श्राद्ध नहीं किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 2 से 6 वर्ष के बच्चों का श्राद्ध नहीं करना चाहिए. Also Read – Sarva Pitru Amavasya 2022 Date and Time: 25 सितंबर को है सर्वपितृ अमावस्या, जानिए अंतिम दिन श्राद्ध कर्म की सही विधि

जरूर करें इन चीजों का दान

  • यदि कोई व्यक्ति राहु-केतु के प्रभाव से परेशान है तो उसे पितृपक्ष के दौरान कुछ चीजों का दान अवश्य करना चाहिए. इससे पितर प्रसन्न होते हैं और राहु-केतु का प्रभाव कम होता है.
  • पितृपक्ष में धोती, कुर्ता, गमछा आदि वस्त्रों का दान करना महत्वपूर्ण होता है. इससे पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है.
  • अगर आप राहु-केतु के प्रभाव से मुक्ति पाना चाहते हैं तो पितृपक्ष में जूते, चप्पल और छाते का भी दान अवश्य करें.
  • पितृपक्ष में ब्राह्मणों के अलावा किसी जरूरतमंद या गरीब को भी भोजन कराना चाहिए. इससे राहु-केतु का दोष कम होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है.
  • केतु के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पितृपक्ष में ‘ॐ स्रां स्रीं स्रौं सरू केतवे नम:’ मंत्र का जाप अवश्य करें.
  • राहु की शांति के लिए इसके बीजमंत्र ‘ ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नम:’ मंत्र का प्रतिदिन एक माला जाप करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

देखें वीडियो और जानें श्राद्ध के नियम

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