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Wednesday, February 8, 2023

20 साल, 283 इंटरनेशनल मैच और 353 विकेट, फिर भी झूलन को किस बात का मलाल, लॉर्ड्स पर सुनाया अपना दर्द

इंग्लैंड के खिलाफ शनिवार को भारतीय महिला टीम जब वनडे सीरीज के तीसरे और आखिरी मैच में मैदान पर उतरेगी तो वह झूलन गोस्वामी के लिए ऐतिहासिक पल होगा. यह उनके इंटरनेशनल करियर का आखिरी मैच होगा. भारत ने मेजबान इंग्लैंड को पहले दो वनडे में मात देकर सीरीज पर पहले ही अपना कब्जा जमा लिया है और अब वह इस सीरीज में 3-0 से जीत दर्ज कर अपनी महान तेज गेंदबाज को खास विदाई देना चाहेगी. लेकिन झूलन गोस्वामी ने अपने अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच की पूर्व संध्या पर कहा कि दो दशक के करियर में उन्हें सिर्फ वनडे वर्ल्ड कप खिताब को नहीं जीत पाने का ‘पछतावा’ है.Also Read – IND vs SA: शानदार माहौल के लिए विराट कोहली ने मैच के बाद कहा- थैंक यू गुवाहटी

झूलन शनिवार को ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे के बाद खेल से संन्यास ले लेंगी. मीडिया के बातचीत के दौरान झूलन ने भावुक होकर कहा कि वह इस खेल के प्रति शुक्रगुजार है, जिसने उन्हें इतनी शोहरत और प्रतिष्ठा दी. उन्होंने कहा कि वनडे वर्ल्ड कप के 2005 और 2017 सत्र में टीम के उपविजेता रहने का मलाल उन्हें हमेशा रहेगा. Also Read – IND vs SA: तीसरे टी20I में बदल जाएगी भारतीय टीम की प्लेइंग XI, ये है वजह

दाएं हाथ की 39 साल की इस गेंदबाज ने कहा, ‘मैंने दो वर्ल्ड कप फाइनल खेले हैं लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत सकी. मुझे बस इसी का मलाल हैं क्योंकि आप चार साल तक वर्ल्ड कप की तैयारी करते हैं. बहुत मेहनत होती है. प्रत्येक क्रिकेटर के लिए वर्ल्ड कप जीतना एक सपने के सच होने जैसा क्षण होता है.’ Also Read – जब मैं टीम इंडिया का कोच था तो मैच के दौरान खर्राटे मारते था: रवि शास्त्री

इस दिग्गज गेंदबाज ने कहा, ‘जब मैंने शुरुआत की थी तो इतने लंबे समय तक खेलने के बारे में कभी नहीं सोचा था. यह बहुत अच्छा अनुभव था. मैं खुद को भाग्यशाली समझती हूं कि इस खेल को खेल सकी. ईमानदारी से कहूं तो बेहद साधारण परिवार और चकदा (पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में) जैसे एक छोटे से शहर से होने के कारण मुझे महिला क्रिकेट के बारे में कुछ भी पता नहीं था.’

झूलन ने कहा कि भारतीय टीम की टोपी (पदार्पण करना) प्राप्त करना उनकी क्रिकेट यात्रा का सबसे यादगार क्षण था. उन्होंने कहा, ‘मेरी सबसे अच्छी याद तब है जब मुझे भारत के लिए खेलने का मौका मिला और मैंने पहला ओवर फेंका क्योंकि मैंने कभी नहीं सोचा था (कि मैं भारत के लिए खेलूंगी). मेरी क्रिकेट यात्रा कठिन रही है क्योंकि अभ्यास के लिए मुझे लोकल ट्रेन से ढाई घंटे की यात्रा करनी पड़ती थी.’

उन्होंने कहा कि वह 1997 वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के मैच को देखने के लिए मैदान में 90,000 दर्शकों मौजूद थे. यहीं से उन्होंने क्रिकेट को करियर बनाने का फैसला किया. उन्होंने कहा, ‘मैं 1997 में ‘बॉल गर्ल’ (मैदान के बाहर की गेंद को वापस करने वाली) थी. वर्ल्ड कप फाइनल को देखने के बाद ही मैंने भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखा था.’

(इनपुट: एजेंसी)

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